एक दृष्टिकोण यह भी है कि राज्य अधिनियमों के तहत स्थापित कृषि उपज विपणन समितियों (APMCs) ने न केवल कृषि के विकास में बाधा डाली है बल्कि भारत में खाद्य मुद्रास्फीति का कारण भी रही हैं। आलोचनात्मक परीक्षण करें।
(UPSC 2014,13 Marks,)
There is also a point of view that Agricultural Produce Market Committees (APMCs) set up under the State Acts have not only impeded the development of agriculture but also have been the cause of food inflation in India. Critically examine.
प्रस्तावना
Explanation
Impediments to Agricultural Development by APMC
- APMCs का एकाधिकार (Monopoly):
o APMCs अक्सर अपने अधिकार क्षेत्र में कृषि बाजारों पर एकाधिकार रखते हैं, जिससे किसानों को सीधे उपभोक्ताओं को या APMC मंडियों के बाहर अपनी उपज बेचने से रोका जाता है।
o यह नियंत्रण प्रतिस्पर्धा को सीमित करता है, जिससे कृषि क्षेत्र में नवाचार और दक्षता प्रभावित हो सकती है।
- अपर्याप्त बुनियादी ढांचा (Inadequate Infrastructure):
o कई APMCs में आधुनिक बुनियादी ढांचे की कमी होती है, जिससे कृषि उपज के प्रबंधन, भंडारण और परिवहन में अक्षमताएं होती हैं।
o खराब सुविधाएं महत्वपूर्ण फसलोत्तर नुकसान का कारण बन सकती हैं, जिससे किसानों की आय और समग्र कृषि उत्पादकता प्रभावित होती है।
- उच्च बाजार शुल्क और चार्ज (High Market Fees and Charges):
o APMCs लेन-देन पर विभिन्न शुल्क और चार्ज लगाते हैं, जिनमें बाजार शुल्क, कमीशन चार्ज और सेस शामिल हैं। ये काफी मात्रा में हो सकते हैं, जिससे किसानों की शुद्ध आय कम हो जाती है।
o शुल्क की बहुलता किसानों को अपनी उपज बाजार में लाने से हतोत्साहित करती है, जिससे बाजार की आपूर्ति और दक्षता प्रभावित होती है।
- बिचौलियों का प्रभुत्व (Middlemen Dominance):
o बिचौलिए या कमीशन एजेंट अक्सर APMC बाजारों में प्रभुत्व रखते हैं, किसानों का शोषण अनुचित प्रथाओं और लेन-देन में पारदर्शिता की कमी के माध्यम से करते हैं।
o इस प्रभुत्व के कारण किसानों को उनकी उपज के अंतिम बाजार मूल्य का छोटा हिस्सा मिलता है।
Contribution to Food Inflation by APMC
- Supply Chain Inefficiencies:
o APMCs (एपीएमसी) की एकाधिकारवादी प्रकृति से बढ़ी आपूर्ति श्रृंखला की अक्षमताएं (inefficiencies) लागत और बर्बादी को बढ़ाती हैं।
o ये अक्षमताएं उपभोक्ताओं के लिए उच्च कीमतों में योगदान करती हैं, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति (food inflation) को बढ़ावा मिलता है।
- Limited Competition:
o APMC (एपीएमसी) बाजारों में प्रतिस्पर्धा की कमी से बिचौलियों को कीमतों में हेरफेर करने की अनुमति मिलती है, जिससे कृषि वस्तुओं की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ जाती हैं।
o नियंत्रित बाजार पहुंच आपूर्ति में बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं, जिससे कीमतें और बढ़ जाती हैं।
- Seasonal Gluts and Shortages:
o APMCs (एपीएमसी) अक्सर मौसमी अधिकता और कमी को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में असमर्थ होते हैं, जिससे मूल्य अस्थिरता होती है।
o खराब बाजार एकीकरण और प्रभावी भंडारण समाधान की कमी के कारण कमी के दौरान कीमतें बढ़ सकती हैं और अधिकता के दौरान गिर सकती हैं।
Reforms and Alternatives
- मॉडल APMC अधिनियम (Model APMC Act):
o केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत मॉडल APMC अधिनियम (Model APMC Act) का उद्देश्य कृषि विपणन को उदार बनाना है, जिससे सीधे बिक्री, निजी बाजार और अनुबंध खेती (contract farming) की अनुमति मिल सके।
o इस अधिनियम का कार्यान्वयन राज्यों में भिन्न होता है, कुछ राज्यों ने इसे पूरी तरह से, आंशिक रूप से या बिल्कुल नहीं अपनाया है।
- ई-नाम (e-NAM - National Agriculture Market):
o ई-नाम (e-NAM) पहल का उद्देश्य APMC बाजारों को एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से एकीकृत करके एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाना है।
o यह बिचौलियों की भूमिका को कम करने और किसानों के लिए बेहतर मूल्य खोज सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
- अनुबंध खेती (Contract Farming):
o अनुबंध खेती (Contract Farming) को बढ़ावा देने से किसानों को सुनिश्चित बाजार और मूल्य मिल सकते हैं, जिससे उनकी APMCs पर निर्भरता कम होती है।
o यह कृषि में निजी निवेश को प्रोत्साहित करता है, जिससे बेहतर बुनियादी ढांचा और प्रथाएं विकसित होती हैं।